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Tag Archives: Hindi Poetry

nashpati poem featured image for scottshak's poem

नाशपाती

नाशपाती नाशपाती,विश्वासघाती नाशपाती,मिठास के आड़ में दे जाती एक विचित्र स्वाद यह नाशपाती। खाने में न मिलेगा कोई साथी, क्योंकि सामने रखी है नाशपाती,उठा उठा कर अकेले खाओ, फल है भाई यह आत्मघाती। जा कर चुपचाप बैठ जाती, चढ़ कर यह मेरे छाती,भुलाने को तो

अकेले चल मुसाफ़िर walk alone wallpaper

अकेले चल मुसाफ़िर

इस तन्हाई की आदत डाल मुसाफ़िर, आगे तुझे अकेला ही चलना पड़ेगा,सफ़र अभी बहुत लम्बा है मुसाफ़िर, यूँ घुटने टेक देगा तो कैसे चलेगा? लोग तो बस राही थे मुसाफ़िर,पैदा तो तू अकेला ही हुआ था,रस्ते सब के अलग होते हैं मुसाफ़िर,तेरे रस्ते तुझे अकेला

tears creative photography

आंसुओं को थाम लो

कस लो कमर आंसुओं को थाम लो आ गई खबर बंद कर दो दफ्तर कर लिया सब काम हो गयी है शाम लगेगी अब रात की फूँकार | चौखट पर है यम की सवारी बैठ कर बस निकलने की है बारी | बंद होगी अब

burnt village featured image

बखेड़ों की बस्ती

लोगों का क्या है,लोग तो भखेड़ों की बस्ती से निकल पड़ते हैं सब सामान बटोरे पर मैं, मैं तो वहीँ रह जाता हूँ महीनो किराया दे वहीँ बस जाता हूँ दुर्घटना स्थल के चक्कर लगाताबार बार दोहराता जो चीज़ें हलक पर रुक गयी थी सब

my nani photo

नानी

क्या पता कैसी थी वो ?अब तो सदियों पुरानी होगी,कैसा था चेहरा ?कैसी थी आँखें ?और कैसी मुस्कान ?कभी देखा ही नही,तो क्या समझूँ कैसी थी वो ? भूल गयी हूँ चेहरा उनकाकहती अक्सर माँ,बचपन में ही खो दिया था,तो क्या समझाऊं कैसी थी वो

sab kuch hai neela poem image

सब कुछ है नीला

चलो कह देतें हैं एक और झूठ,आखिर दुनिया में सच है ही क्या? आकाश का रंग,है आँखों का छलावा |अगर अंबर है नीला,तो मेरा मन भी है नीला,मेरी ज़ुबान भी है नीली, मेरा पैसा भी नीला |मेरे बाल,चलो कुछ तो सफ़ेदपर बाकी सब है नीले

mera chhota sa jahaz image

मेरा छोटा सा जहाज़

बादल नीचे,आसमान अब भी ऊपर,तैरता सफ़ेद रज़ाई परमेरा छोटा सा जहाज़ |पंखियों से अपने काटे रस्ता,रस्ता नापे दिशाहीन नीले अंबर का,ऊंचाइयों को बतलाताअपने कद का मसलाकैसे लोग उसे हमेशा,हमेशा ही नज़रअंदाज़ करते |कैसे तौली जाती बाते उसकीआकारों के तराज़ू मेंऔर मोल कभी सही न लगताउसके

tommy inberg photo for scottshak's poem

मैं भी कभी कभी लिख लेता हूँ

मैं भी कभी कभी लिख लेता हूँ,जलता हूँ अक्सरउन लोगों सेजो कितनी आसानी से अपनी बात कह देते हैं,जो दिल में होता है उसे तुरंत ही रख देते हैं |कैसे?कैसे ज़िन्दगी इतनी सहल कर रखी है भला?क्यों नहीं कभी भरता तुम्हारी सोच का घड़ा?वह क्या

touching water in autumn photo for scottshak's poem

साक्ष्य

खोजूं तेरे समभावशब्दों की धुरी में, तेरी आदतों में छिपती हैमेरी परछाइयों के निशाँ |तू सर्द में है वो मख़मली कम्बल,ओढ़ते ही जो भुला दे दिन रात का पता |हरारत में तेरी उँगलियों के छींटे,सौंप दे जो ओस की सीत्कार,तू शब्द है ऐसे प्रचंड,लगते ही

sick image for scottshak's poem

बीमार

ऐ बीमारतू है किसका शिकार ? शायद वो हवाजो चली थी सर्राटे से,बदल गई मिजाज तेरे,सिकोड़ गई तुझेअपने आवरण में,ले गई तुझे अपने भीतरखुद से अवगत कराने | या वो पानी जो तू पी गयाबिन सोचे समझे,तू कहता थापानी का रंग तोदिखता है प्यासे को,मैंने