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Tag Archives: Hindi Poetry

kanch ki macchli image

कांच की मछली

कांच की मछली,कांच में रहती,पानी तो बस ढोंग है,घर है मेरा चार दीवारीरस्ता डामाडोल है | खाना मेरादाना होता,हर सुबह की जंग है,कभी कभी तोकुछ नही मिलतापानी के इस रंग में | सबका व्यंजन,मैं मनोरंजन,भूखे मुझको ताकते, कितनी बड़ी है,कितनी छोटी,अक्सर मुझको आंकते | लोग

inside of a well image

कुएँ का मेंढक

कुँए का मेंढकक्या तू जानेदुनिया कितनी गोल रेघर के अंदरसब है सीधाबाहर सब अनमोल रे | तुझे लगता हैसब सीमित हैआशाओं के किले मेंबाहर की दुनियातो लगतीमनोरथ के जिले में | आकाश समंदरसब है नीलेफिर क्यों जानु रंग मैंकिस्मत हो जबमेरी कालीक्यों न पकड़ूँ पलंग

amit bhar drawing of mom

माँ तुम ना हो तो

माँ तुम ना हो तो,हर शब्द है चिंघाड़,हर जिद्द है नखरा,हर कदम पर चोट,मरहम दे आँसू,हर बच्चा कंधाऔर जुबां बंदूक | हर गाना है तानाजो चुभता रोज़ाना,हर बात है बतंगड़,हर लफ्ज़ है कराहना,हर काम है पर्वत,हर लक्ष्य है चोटिल | असीम अँधेरा,ढूंढू तुझे हर दिनहै