Browse By

Tag Archives: scottshak hindi poems

ग़म का बवंडर

है एक बवंडर, मेरे घर के बाहर, जो अक्सर मेरी मज़बूत दीवारों को झंझोड़ कर रख देता है। होता है कभी-कभी मेरा घर किलकारियों से प्रज्वलित, कुछ अस्थायी भाव आते हैं, जाते हैं, रहते हैं मेरे इर्द-गिर्द, पर फिर न जाने कब एकाएक उस बवंडर

yadi tum aate is sard me toh poem image

यदि तुम आते इस सर्द में

तुम आते इस सर्द में तो तुम्हें मख़मली रजाई बन अपने भीतर समा लेता। जब तुम आँख मूँदकर सोते, तो तुम्हारे बालों में अपनी उँगलियों की कंघी से बेबात तुम्हें सँवारता। वह बिन तेल मालिश, जो तुम्हारे सिर के पीछे बेवजह कभी शुरू, कभी ख़त्म

sapne man dreaming image

सपने

जब तुमने छीन ली मेरी साँसें, तुमने न केवल मेरा सुकून छीना, तुमने छीने मेरे सारे सपने, जो मैं न जाने कब से पिरो रहा था। तेरे संग से भी ज़्यादा ज़रूरी था शायद उन ख्वाबों का पूरा होना, मेरे चलने का सहारा होना, तेरे

सर्दी आई कविता का image

सर्दी आई

सर्दी आई धीमे से बिन दस्तक तुम्हारी खिड़कियों दरवाज़ों की बेजोड़ नाकाबंदी  पर बेलगाम बेहिचक आक्रमण कर दहलीज़ों की छिद्रों से घुसपैठ कर बिन आहट बिस्तर पर चढ़ अपनी तलवार गर्दन पर रख तुमसे सवाल कर बैठी की जीना है तो मेरे इशारों पर जीना

Photo for intezaar hindi poem - (waiting) scottshak's poem

इंतज़ार

रातों की नींद गायब है,अनहोनी की बिल्लाहट से,कोई तो छिपा है झाड़ियों में जो कर रहा इंतज़ार,मेरी तरह, मेरे सो जाने का। अंधेरे की दस्तक है,याद नहीं कि,दरवाज़ा बंद किया था या नहीं,फटी चादर ओढ़े,निराश्रय निहारता प्रकाश के ख़ाली झोले को, सोच में डूबाकौन है

image for scottshak poem रात भी ज़रूरी है

रात भी ज़रूरी है

दिन की इच्छा रखने वाले,अंधकार में रहना सीख,काल जीव के शैली में रात भी ज़रूरी है। प्रकाश की चाहत भी तोउठी थी अंधियारे से,विष के प्रभाव से हीअमृत पनपता है। पाने की इच्छा है तोकुछ खोना भी ज़रूरी है,दुर्गंध की अवगुण से ही पुष्प का

old locked door creative photo for scottshak's poem

घर न जा परिंदे

घर न जा परिंदे वहाँ ताला है बदला, तेरी चाबी से अब न खुलेगा,वापस कहाँ जाएगा?इतने दिनों तू था एक अजनबी, अब तुझे क्यों कोई गले लगाएगा?जिस युद्ध में था तू डूबा,वहाँ जाने से तुझे था रोका ,तू फिर भी लड़ने था दौड़ाकी तेरा रक्त

sad pic for scottshak's hindi poem

मैं यहीं ठीक हूँ

जब तुम ठहरे हो एक कगार पर,कि अब टूटे की तब टूटे,जहाँ टूटने के सिवा और कुछ न कभी होता,इंतज़ार के चौखट पर शायद ही मन कभी सोता,तो क्या फ़ायदा हथेलियों का? जब रेत रोके न रुके, जब हर सोच हो बिखरने की, रास्ता हो

nashpati poem featured image for scottshak's poem

नाशपाती

नाशपाती नाशपाती,विश्वासघाती नाशपाती,मिठास के आड़ में दे जाती एक विचित्र स्वाद यह नाशपाती। खाने में न मिलेगा कोई साथी, क्योंकि सामने रखी है नाशपाती,उठा उठा कर अकेले खाओ, फल है भाई यह आत्मघाती। जा कर चुपचाप बैठ जाती, चढ़ कर यह मेरे छाती,भुलाने को तो

अकेले चल मुसाफ़िर walk alone wallpaper

अकेले चल मुसाफ़िर

इस तन्हाई की आदत डाल मुसाफ़िर, आगे तुझे अकेला ही चलना पड़ेगा,सफ़र अभी बहुत लम्बा है मुसाफ़िर, यूँ घुटने टेक देगा तो कैसे चलेगा? लोग तो बस राही थे मुसाफ़िर,पैदा तो तू अकेला ही हुआ था,रस्ते सब के अलग होते हैं मुसाफ़िर,तेरे रस्ते तुझे अकेला