आंसुओं को थाम लो
कस लो कमर आंसुओं को थाम लो आ गई खबर बंद कर दो दफ्तर कर लिया सब काम हो गयी है शाम लगेगी अब रात की फूँकार | चौखट पर है यम की सवारी बैठ कर बस निकलने की है बारी | बंद होगी अब
कस लो कमर आंसुओं को थाम लो आ गई खबर बंद कर दो दफ्तर कर लिया सब काम हो गयी है शाम लगेगी अब रात की फूँकार | चौखट पर है यम की सवारी बैठ कर बस निकलने की है बारी | बंद होगी अब
चलो कह देतें हैं एक और झूठ,आखिर दुनिया में सच है ही क्या? आकाश का रंग,है आँखों का छलावा |अगर अंबर है नीला,तो मेरा मन भी है नीला,मेरी ज़ुबान भी है नीली, मेरा पैसा भी नीला |मेरे बाल,चलो कुछ तो सफ़ेदपर बाकी सब है नीले
मैं भी कभी कभी लिख लेता हूँ,जलता हूँ अक्सरउन लोगों सेजो कितनी आसानी से अपनी बात कह देते हैं,जो दिल में होता है उसे तुरंत ही रख देते हैं |कैसे?कैसे ज़िन्दगी इतनी सहल कर रखी है भला?क्यों नहीं कभी भरता तुम्हारी सोच का घड़ा?वह क्या
कांच की मछली,कांच में रहती,पानी तो बस ढोंग है,घर है मेरा चार दीवारीरस्ता डामाडोल है | खाना मेरादाना होता,हर सुबह की जंग है,कभी कभी तोकुछ नही मिलतापानी के इस रंग में | सबका व्यंजन,मैं मनोरंजन,भूखे मुझको ताकते, कितनी बड़ी है,कितनी छोटी,अक्सर मुझको आंकते | लोग