अकेले चल मुसाफ़िर
इस तन्हाई की आदत डाल मुसाफ़िर, आगे तुझे अकेला ही चलना पड़ेगा,सफ़र अभी बहुत लम्बा है मुसाफ़िर, यूँ घुटने टेक देगा तो कैसे चलेगा? लोग तो बस राही थे मुसाफ़िर,पैदा तो तू अकेला ही हुआ था,रस्ते सब के अलग होते हैं मुसाफ़िर,तेरे रस्ते तुझे अकेला
इस तन्हाई की आदत डाल मुसाफ़िर, आगे तुझे अकेला ही चलना पड़ेगा,सफ़र अभी बहुत लम्बा है मुसाफ़िर, यूँ घुटने टेक देगा तो कैसे चलेगा? लोग तो बस राही थे मुसाफ़िर,पैदा तो तू अकेला ही हुआ था,रस्ते सब के अलग होते हैं मुसाफ़िर,तेरे रस्ते तुझे अकेला
कस लो कमर आंसुओं को थाम लो आ गई खबर बंद कर दो दफ्तर कर लिया सब काम हो गयी है शाम लगेगी अब रात की फूँकार | चौखट पर है यम की सवारी बैठ कर बस निकलने की है बारी | बंद होगी अब
लोगों का क्या है,लोग तो भखेड़ों की बस्ती से निकल पड़ते हैं सब सामान बटोरे पर मैं, मैं तो वहीँ रह जाता हूँ महीनो किराया दे वहीँ बस जाता हूँ दुर्घटना स्थल के चक्कर लगाताबार बार दोहराता जो चीज़ें हलक पर रुक गयी थी सब
क्या पता कैसी थी वो ?अब तो सदियों पुरानी होगी,कैसा था चेहरा ?कैसी थी आँखें ?और कैसी मुस्कान ?कभी देखा ही नही,तो क्या समझूँ कैसी थी वो ? भूल गयी हूँ चेहरा उनकाकहती अक्सर माँ,बचपन में ही खो दिया था,तो क्या समझाऊं कैसी थी वो
चलो कह देतें हैं एक और झूठ,आखिर दुनिया में सच है ही क्या? आकाश का रंग,है आँखों का छलावा |अगर अंबर है नीला,तो मेरा मन भी है नीला,मेरी ज़ुबान भी है नीली, मेरा पैसा भी नीला |मेरे बाल,चलो कुछ तो सफ़ेदपर बाकी सब है नीले
बादल नीचे,आसमान अब भी ऊपर,तैरता सफ़ेद रज़ाई परमेरा छोटा सा जहाज़ |पंखियों से अपने काटे रस्ता,रस्ता नापे दिशाहीन नीले अंबर का,ऊंचाइयों को बतलाताअपने कद का मसलाकैसे लोग उसे हमेशा,हमेशा ही नज़रअंदाज़ करते |कैसे तौली जाती बाते उसकीआकारों के तराज़ू मेंऔर मोल कभी सही न लगताउसके
कांच की मछली,कांच में रहती,पानी तो बस ढोंग है,घर है मेरा चार दीवारीरस्ता डामाडोल है | खाना मेरादाना होता,हर सुबह की जंग है,कभी कभी तोकुछ नही मिलतापानी के इस रंग में | सबका व्यंजन,मैं मनोरंजन,भूखे मुझको ताकते, कितनी बड़ी है,कितनी छोटी,अक्सर मुझको आंकते | लोग
कुँए का मेंढकक्या तू जानेदुनिया कितनी गोल रेघर के अंदरसब है सीधाबाहर सब अनमोल रे | तुझे लगता हैसब सीमित हैआशाओं के किले मेंबाहर की दुनियातो लगतीमनोरथ के जिले में | आकाश समंदरसब है नीलेफिर क्यों जानु रंग मैंकिस्मत हो जबमेरी कालीक्यों न पकड़ूँ पलंग
माँ तुम ना हो तो,हर शब्द है चिंघाड़,हर जिद्द है नखरा,हर कदम पर चोट,मरहम दे आँसू,हर बच्चा कंधाऔर जुबां बंदूक | हर गाना है तानाजो चुभता रोज़ाना,हर बात है बतंगड़,हर लफ्ज़ है कराहना,हर काम है पर्वत,हर लक्ष्य है चोटिल | असीम अँधेरा,ढूंढू तुझे हर दिनहै