यदि तुम आते इस सर्द में

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तुम आते इस सर्द में
तो तुम्हें मख़मली रजाई बन
अपने भीतर समा लेता।

जब तुम आँख मूँदकर सोते,
तो तुम्हारे बालों में
अपनी उँगलियों की कंघी से
बेबात तुम्हें सँवारता।

वह बिन तेल मालिश,
जो तुम्हारे सिर के पीछे
बेवजह
कभी शुरू, कभी ख़त्म
होती रहती।

और तुम्हारे गालों को
प्यार से
अपनी पहली उँगली
के पिछले हिस्से से
सहलाता रहता।

तुम्हारी आँखों की
नाज़ुक पंखुड़ियों को
बस यूँ ही
निहारता रहता,

कभी-कभी उन्हें चूम,
प्रतीक्षा करता
उनके किसी परदे-भाँति
ऊपर उठने की,

कि किसी मूरत हेतु
किसी अलौकिक दृश्य के
दर्शन हो जाएँ।

तुम्हारी एकाएक ली गई करवट से
दबकर उत्पन्न होने वाली
हर प्रगाढ़ पीड़ा के
हर विष को
मैं नीलकंठ भाँति
निगल जाता।

तुम्हें हर खोई हुई नींद से बचाकर
एक लंबी,
अटूट चैन की नींद
सोने देता।

तुम्हारे नाख़ून,
जो मेरे हाथों को
बिना सूचना
एकाएक चुभो देते
किसी अनचाहे विचार से डरकर—

मैं तुरंत
तुम्हें इतनी ज़ोर से
आलिंगन में भर लेता,
और तब तक न छोड़ता,
जब तक मुझमें

सिर्फ इतनी ही शक्ति शेष रह जाती
कि मेरी साँसें भले ही तेज़ हो जातीं,
पर तुम्हारी साँसों को
मैं फिर शांत कर जाता।

यदि तुम आते इस सर्द में।

 

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