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afternoon दोपहर creative photography

दोपहर

दोपहर !तेरे बारे मे कोई न कहे,याद तुझे कोई न करे।उठता हूँ अधूरा रोज़ सुबह मुझे पूरा तू ही करे। तेरे चुपके से आने का इंतज़ार कौन ही करता है ?तू खामखा खड़ा हैचौखट पर,लोटे की ताक मे,तुझे अर्चन देनेकौन ही आएगा ? मुर्झायें डालों परहर